हल्द्वानी: कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली शोधार्थी डॉ. चंद्र प्रकाश तिवारी ने 20 अप्रैल को अपना अंतिम पीएचडी वाइवा सफलतापूर्वक पूर्ण कर डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की उपाधि प्राप्त की। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, गुरुजनों और पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।

डॉ. तिवारी के पिता वेद प्रकाश तिवारी, जो एक सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हैं, तथा माता रेखा तिवारी ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी पत्नी बबीता तिवारी का भी विशेष योगदान रहा, जिन्होंने हर परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाया।
डॉ. तिवारी ने “कुमाऊं हिमालय में पाए जाने वाले धनिया (Coriandrum sativum L.) के विभिन्न जीनोटाइप्स में आणविक, रासायनिक एवं जैव-सक्रियता का अध्ययन” विषय पर कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से अपना शोधकार्य पूर्ण किया। यह शोध उन्होंने प्रो. कमल के. पांडे (पूर्व निदेशक, उच्च शिक्षा उत्तराखंड) एवं सह-मार्गदर्शक प्रो. वीना पांडे (विभागाध्यक्ष, बायोटेक्नोलॉजी) के निर्देशन में संपन्न किया।

अपने शोध में उन्होंने पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और चंपावत जिलों से एकत्रित धनिया के विभिन्न जीनोटाइप्स का गहन अध्ययन किया। इसमें आणविक स्तर पर RAPD मार्कर, रासायनिक विश्लेषण के लिए GC-MS तकनीक तथा जैव-सक्रियता के अंतर्गत एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों का परीक्षण किया गया।
शोध के निष्कर्षों में पाया गया कि धनिया के एसेंशियल ऑयल में लिनालूल प्रमुख यौगिक है, जिसकी मात्रा 70 प्रतिशत से अधिक है। यह यौगिक अपनी रोगाणुरोधी क्षमता के लिए जाना जाता है, जो बैक्टीरिया और फंगस को नष्ट करने में सहायक होता है। इसके अलावा जेरानिल एसीटेट, अल्फा-पिनीन, कपूर और ओलिक एसिड जैसे अन्य यौगिक भी इसमें पाए गए।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि 1500 से 1900 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाने वाले जीनोटाइप्स में रासायनिक विविधता अधिक होती है। विशेष रूप से सैंपल ‘C’ में 93 प्रकार के यौगिक पाए गए, जो इसे औषधीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं।
जैव-सक्रियता परीक्षण में धनिया का तेल ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया, खासकर Klebsiella pneumoniae के खिलाफ प्रभावी पाया गया, वहीं Candida tropicalis पर भी इसकी एंटी-फंगल क्षमता उत्कृष्ट रही। यह शोध प्राकृतिक औषधियों, फूड प्रिजर्वेटिव्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स के विकास के लिए नए रास्ते खोलता है।
डॉ. तिवारी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने मार्गदर्शकों और परिवार को दिया। इस उपलब्धि पर क्षेत्र के शिक्षाविदों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।