देहरादून में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा सोशल मीडिया पर लाइव आकर पूर्व विधायक की कथित ऑडियो वायरल करने के बाद प्रदेश की राजनीति में खलबली मच गई है। वहीं, इस मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक लोग सड़कों पर उतर आए हैं और जगह-जगह धरना-प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

हालांकि, इस पूरे मामले पर एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान हत्याकांड में किसी भी वीआईपी की संलिप्तता के प्रमाण नहीं मिले हैं। इसी बीच भाजपा नेता सुरेश राठौर ने अभिनेत्री उर्मिला सनावर समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया है।
इस घटनाक्रम के बीच अंकिता हत्याकांड के बाद गठित एसआईटी के पूर्व सदस्य और तत्कालीन एसपी देहात हरिद्वार शेखर सुयाल ने अहम खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान कथित वीआईपी की पहचान जरूर हुई थी, लेकिन उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले। उस समय यह चर्चा थी कि रिसॉर्ट में किसी वीआईपी के आने की संभावना थी और उसे विशेष सेवाएं देने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था। अंकिता द्वारा इनकार किए जाने के बाद ही उसकी हत्या किए जाने की बात सामने आई थी।
शेखर सुयाल ने बताया कि शुरुआत में अंकिता की गुमशुदगी दर्ज की गई थी, लेकिन एसआईटी की जांच में हत्या का खुलासा हुआ। मामले में तेजी दिखाते हुए एसआईटी ने महज पांच घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि अंकिता और उसके दोस्त के बीच हुई चैटिंग में भी वीआईपी का जिक्र सामने आया था, जिसके चलते इस एंगल की गहन जांच की गई। फिलहाल, पूरे प्रदेश में इस मामले को लेकर माहौल गरमाया हुआ है और लोगों की मांग है कि अंकिता को पूरी तरह न्याय मिले और मामले की निष्पक्ष जांच हो।