उत्तराखंड: ब्लैक लिस्ट में शामिल संस्था पर लोनिवि के अफसर हुए मेहरबान

ख़बर शेयर कर सपोर्ट करें

देहरादून। उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट के तहत काली सूची में दर्ज कंसलटेंसी संस्था पर लोक निर्माण विभाग के अफसरों की मेहरबानी हो गई है। ब्लैक लिस्टेड कंपनी का लोनिवि में इंपैनलमेंट दो साल के लिए बढ़ा दिया गया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब फर्म के खिलाफ जांच चल रही थी और उसे काली सूची में डाल दिया गया था, तो उसका इंपैनलमेंट बढ़ाने की क्या जल्दबाजी थी? 

यह भी पढ़ें -   covid update : प्रदेश में मिले केवल 287 कोरोना पॉजिटिव मरीज,1614 मरीज हुए स्वस्थ ,


जानकारी के अनुसार, मैसर्स टेक्निकल कंसलटेंसी सर्विस ने उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी परियोजना की प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट के तहत भवन निर्माण की डीपीआर तैयार की। इस डीपीआर में तकनीकी खामियां पकड़ में आई। जांच के बाद परियोजना के प्रोग्राम मैनेजर एसए मुरुगेशन ने फर्म को तीन बार कारण बताओ नोटिस भेजा। पहला नोटिस 10 जून 2019 को, दूसरा 22 जुलाई 2019 और तीसरा कारण बताओ नोटिस चार फरवरी 2020 को भेजा गया।

यह भी पढ़ें -   उत्तराखंड :- दर्दनाक सड़क हादसा ,युवक की मौत......एक महीने पहले ही हुई थी युवक की शादी ,


लेकिन फर्म संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। जवाब से असंतुष्ट प्रोग्राम मैनेजर ने 15 जुलाई 2020 को उसे विश्व बैंक पोषित परियोजनाओं के कार्यों से बाहर कर दिया और उसे पांच साल के लिए काली सूची में डाल दिया। आदेश की प्रति सचिव लोनिवि व प्रमुख अभियंता लोनिवि को भी भेजी  दी। अब सवाल ये है कि जब फर्म के खिलाफ जांच चल रही थी, तो फर्म का इंपैनलमेंट करने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता मुख्यालय ने फर्म को दो साल के लिए सूचीबद्धता का प्रमाणपत्र जारी कर दिया। यह प्रमाण पत्र कंपनी के काली सूची में शामिल होने से पहले ही एक जुलाई 2020 को दे दिया गया। इस संबंध में फर्म का पक्ष लेने के लिए सूचीबद्धता प्रमाणपत्र में दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया। लेकिन संपर्क नहीं हुआ। जब भी पक्ष प्राप्त होगा, उसे हूबहू प्रकाशित किया जाएगा।

यह भी पढ़ें -   हल्द्वानी :- बीते एक महीने में मौत का बड़ा आकड़ा आया सामने , नगर निगम की ओर से 800 मृत्यु प्रमाण पत्र हुए जारी
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments