नैनी झील से सटी दीवार और सड़क के धंसने का कारण बन रही ये मछलियां, वैज्ञानिकों के शोध में हुआ खुलासा…

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खाने की तलाश में कॉमन कार्प मछलियों खोद रही झील किनारे की दीवारों की मिट्टी

नैनीताल। नैनी झील के पारिस्थितिकी तंत्र पर खतरा मंडरा रहा है, यहां झील में रहने वाली कॉमन कार्प प्रजातियों की मछलियों की संख्या लगातार बढ़ने से झील की सुरक्षा दीवारों को नुकसान पहुंच रहा है। यह मछलियां खाने की तलाश में दीवारों की मिट्टियां खोद रही हैं। जो झील से सटी दीवार और सड़क के धंसने का कारण बन रही है। 

पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के द्वारा किये गए एक अध्ययन में पता चला है कि नैनी झील में पाई जाने वाली कॉमन कार्प मछलियां भोजन की तलाश में निबलिंग कर झील किनारे की दीवारों की मिट्टी को खोद रही है, जिससे शहर की मॉल रोड समेत अन्य पहाड़ियों पर भू धंसाव की समस्या हो रही है। 

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मामले में जानकारी देते हुए नैनीताल के जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्बियाल ने बताया कि नैनी झील में करीब 60 प्रतिशत कॉमन कार्प मछलियां है जो नैनी झील के पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर कर रही है। बताया कि यह खाने की तलाश में झील के भीतर भूमि पर निबलिंग कर रही है। जिससे मॉल रोड समेत, झील किनारे की सुरक्षा दीवारों के भू कटाव का कारण माना सकता है। जिलाधिकारी ने कहा कि कामन कार्प मछलियों की संख्या सीमित करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। वैज्ञानिकों की राय से समय समय पर इन्हें निकाला जा रहा है। 

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महाशीर मछलियों की संख्या बढ़ाने के लिए चलाया जा रहा अभियान

 कॉमन कार्प मछलियों को झील से निकालने का काम करने के साथ ही नैनी झील के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत महाशीर मछलियों के बीज डालने का काम किया जा रहा है। हाल ही में झील में 10 हजार महाशीर मछलियों के बीज डाले गए हैं। शीत जल मत्स्य अनुसंधान केंद्र के निदेशक पीके पांडे का कहना है कि झील में महाशीर मछली को डाला जा रहा है, जिससे  झील के इकोसिस्टम को सुरक्षित रखा जा सके।

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