नैनीताल वालों को बहुत याद आएंगे गजोधर भैया…

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41 दिन मौत से जिंदगी के लिए लड़ाई लड़ते हुए सबके चेहरे पर मुस्कान लाने वाले राजू श्रीवास्तव आज अपनी देह को त्यागकर दूसरे लोक चले गए हैं। राजू श्रीवास्तव ने तीन दशक तक लोगों के दिलों पर राज किया। लाफ्टर चैलेंज से घर-घर में पहचान पाने वाले राजू का गजोधर किरदार को खूब सराहा गया। उन्होंने आम आदमी के जीवन से जुड़े किस्सों को अपनी कॉमेडी का विषय बनाया। इस वजह से वह लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गए। सही मायने में उन्होंने ही देश में स्टैंडअप कॉमेडी के नए आयाम खोले। भले ही वह दि ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज न जीत पाए हों लेकिन वह शो राजू श्रीवास्तव की वजह से ही हिट हुआ।

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राजू सिचुएशनल कॉमेडी के उस्ताद थे। चीजों का अवलोकन करने की उनमें अद्धुत क्षमता थी। एक आम आदमी के जीवन के रोजमर्रा के अनुभवों से उन्होंने ऐसे किरदार गढ़े, जो लगातार मशहूर हो गए। उनके ज्यादातर एक्ट ग्रामीण परिवेश के इर्दगिर्द बुने गए थे। उनके ऐक्ट में देखा गया कि ग्रामीण परिवेश के लोग शहरों में कैसे संघर्ष करते हैं। फिर चाहे वह यहां के मॉल हों या सिनेमा हॉल, टैक्सी वाला हो या फिर ट्रेनों में सफर कर रहा व्यक्ति, राजू श्रीवास्तव ने हर किसी के व्यक्तित्व को अपनी कॉमेडी के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाया। उनकी भारत के मध्यम वर्ग में अच्छी पकड़ थी। जब वह माइक पर महानायक अमिताभ बच्चन की आवाज निकालते तो हर कोई खिलखिला उठता। उनकी कॉमेडी द्विअर्थी नहीं थी, जिस कारण पूरा परिवार उन्हें देखकर एक साथ मुस्कुराता था। मैंने प्यार किया, आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया, बॉम्बे टू गोवा जैसी फिल्मों में अपनी उपस्थिति मात्र से लोगों को गुदगुदाने वाले राजू का यूं जाना आज हर किसी को अखर रहा है।

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दो साल पहले 25 दिसंबर को राजू श्रीवास्तव अपना जन्मदिन मनाने के लिए रामनगर स्थित कॉर्बेट नेशनल पार्क पहुंचे थे। इसके बाद वह अचानक नैनीताल पहुंच गए। मॉलरोड पर मास्क पहने राजू को पहले तो लोग नहीं पहचान पाए लेकिन जब उन्होंने मास्क उतारा तो सेल्फी लेने वालों का हुजूम उमड़ पड़ा। तब राजू ने बताया था कि उन्हें नैनीताल बहुत पसंद है। झील किनारे बैठना उन्हें सुकून देता है। यही कारण है कि जब भी समय मिलता है, वह सरोवर नगरी पहुंच जाते हैं।

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