मिलिए बागेश्वर के इस “अथातो घुमक्कड़” से! जिसने साईकिल से तय कर डाला 14 देशों का सफर…अभी भी यात्रा जारी…

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घूमने का शौक रखने वाले लोग अपनी लाइफ में एक बार वर्ल्ड टूर तो जरूर करना चाहते हैं। लेकिन अधिकतर लोगों की जिंदगी में काम की व्यस्तता और घर की जिम्मेदारी के चलते घूमने का यह शौक पीछे छूट जाता है। हालांकि कुछ विरले ऐसे भी होते हैं, जिन्हें “अथातो घुमक्कड़” कहा जाता है, जो घूमने के शौक के चलते सारी बाधाओं को पार कर सिर्फ घूमते हैं। आज हम आपको उत्तराखंड के बागेश्वर के रहने वाले ऐसे ही एक शख्स से मिलाने जा रहे हैं, जिनकी उम्र महज 24 साल है और जो पिछले 7 सालों से साइकिल से सफर कर रहे हैं और इस शौक के चलते उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी तक नहीं की।

हम बात कर रहे हैं बागेश्वर जिले के गरुड़ देवनाई के रहने वाले प्रदीप राणा की। प्रदीप दुनिया के 14 देशों की यात्रा साईकिल से पूरी कर चुके हैं। यात्रा करने के साथ ही वह विभिन्न देशों की संस्कृति से भी रूबरू होते हैं और उनके पकवान, त्योहार, वेशभूषा के बारे में अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर जरूर शेयर करते हैं। खास बात यह है कि विदेशों में वह अपनी पहाड़ी संस्कृति का परचम लहरा रहे हैं, पहाड़ी लोक गीतों को गाकर वह अपने साथ विदेशियों को भी थिरकने पर मजबूर कर देते हैं।

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प्रदीप बताते हैं, जब वह महज 16 साल के थे तो उन्होंने साईकिल से दुनिया घूमने का मन बनाया। क्योंकि पिता पेशे से किसान हैं, इसलिए घर की आर्थिक स्थिति भी कुछ अच्छी नहीं है। लेकिन घूमने के शौक ने उन्हें औरों से अलग सोच दी और इस सोच ने उन्हें जज्बा दिया, आगे बढ़ने का। वह कहते हैं 30 साल की उम्र तक साईकिल चलाकर पूरी दुनिया घूम लेंगे।

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हॉलीवुड की फिल्म देखकर मिली प्रेरणा
प्रदीप बताते हैं कि साइकिल से दुनिया घूमने की प्रेरणा उन्हें हॉलीवुड की एक फिल्म से मिली। प्रदीप ग्राफिक एरा दून में बीएससी आईटी से पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन विश्व भ्रमण के जुनून के चलते उन्होंने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।

नेपाल से थाईलैंड, लाउस, वियतनाम, कंबोडिया, मलेशिया व अन्य देश पहुंचे…

प्रदीप ने साल 2016 में पड़ोसी देश नेपाल की राजधानी काठमांडू की यात्रा की। 2017 में सात महीने की अवधि में साईकिल से भारत भ्रमण किया। इसके बाद विश्व भ्रमण की चाह में साल 2018 में उन्होंने यात्रा के सहयोग के लिए स्पोंसर ढूंढे। 2019 में वर्ल्ड टूर शुरू किया, जिसमें वह अपने पैतृक गांव गरुड़ देवनाई से हल्द्वानी होते हुए पड़ोसी देश नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार होते हुए थाईलैंड, लाउस, वियतनाम, कंबोडिया, मलेशिया साइकिल से पहुंचे। उन्हें सिंगापुर बॉर्डर क्रॉस करना था। जिसके लिए वीजा भी मिल चुका था। उसी बीच कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण प्रदीप को 4 महीने मलेशिया में क्वॉरेंटाइन होना पड़ा। फिर वह भारत लौट आये।

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2 साल बाद फिर से शुरू किया सफर, उत्तराखंड के NRI कर रहे मदद

प्रदीप ने 2 साल बाद कोरोना संक्रमण के कम होने पर एक बार फिर से अपना सफर शुरू किया है। 15 मई 2022 को दिल्ली से फ्लाइट के माध्यम से वह केन्या पहुंचे। केन्या से फिर दूसरे चरण में प्रदीप ने अपनी साइकिल यात्रा शुरू करते हुए युगांडा, रॉवांडा, बुरुंडी की यात्रा की। अभी इन दिनों वह अफ्रीका के तंजानिया में हैं। इसके बाद वह मालावी, मोजावे होते हुए अफ्रीका के 54 देशों का भ्रमण करेंगे। बताया कि इस यात्रा में उत्तराखंड के NRI भी उनकी मदद कर रहे हैं।

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