उत्तराखंड के वॉटर हीरो ने शुरू की नई पहल, पहाड़ों में हरे सोने को बचाने की कवायद में शुरू किया ये काम…..

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पर्यावरण संरक्षण के लिए शहरों से अपना रोजगार छोड़कर गांव में रहकर वृक्षारोपण को बढ़ावा देने वाले ओखलकांडा ब्लॉक के नाई गांव निवासी चंदन इन दिनों एक नई मुहिम के साथ प्रकृति सवारने में जुटे हुए हैं। इस मुहिम से चंदन ने न केवल अपने गांव को शुद्ध हवा पानी देने की ठानी है बल्कि इन दिनों वह दूसरे गांवों में भी व्यापक स्तर पर प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैला रहे हैं।

उत्तराखंड के जंगलों में यूं तो वृक्षों की कई प्रजातियां पाई जाती है। लेकिन बांज को उत्तराखंड के जंगलों का हरा सोना भी कहा जाता है। प्रकृति प्रेमी चंदन नयाल इन दिनों इसी सोने के संरक्षण को मुहिम बनाकर काम कर रहे हैं।दरअसल पर्यावरण की दृष्टि से देखें तो बांज से वायुमंडल को ऑक्सीजन की भरपूर मात्रा देने के साथ ही पानी के स्रोतों को भी रिचार्ज वॉटर मिलता है। वहीं बरसात के दिन बांज के वृक्षारोपण के लिए अनुकूल होते हैं जिसके चलते चंदन नयाल अपने गांव के साथ ही बाहरी गांवों में भी बांज के पौधों का रोपण कर रहे हैं।

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बता दें कि चंदन नयाल ने प्रकृति संरक्षण के लिए अपने घर ” बांज लगाओ बांज बचाओ ” की पहल को गांव गांव तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। चंदन ने बताया कि हाल ही में उन्होंने अपनी नर्सरी से 10,000 बांज के पौंधे जंगलों में लगाए हैं। तो वहीं अभी तक चंदन ने कुल 32000 बांज के ही पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया है। चंदन का कहना है कि शुरुवात में केवल उनके गांव के ग्रामीणों ने इस पहल में उनका साथ दिया था। लेकिन गुजरते वक्त के साथ अब बाहरी गांव जैसे धानाचूली, परबड़ा और खनस्यु सुनकिया जैसे कई गांवों से लोग अब उनकी बांज लगाओ बांज बचाओ मुहिम ने जुड़ रहे हैं।

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पहाड़ को हरा भरा और स्वच्छ रखने के काम करने वाले चंदन को हाल ही में सरकार ने हिमालय दिवस के दिन सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी सम्मानित किया गया है।
इसके अलावा साल 2020 में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने चंदन नयाल को वॉटर हीरो की उपाधि से नवाज़ा था। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 दिसंबर 2020 को ‘मन की बात’ के ट्विटर हैंडल पर पर्यावरण प्रेमी चंदन नयाल का जिक्र भी किया था। चंदन ने पर्यावरण को बचाने का संदेश देते हुए लोगों से भी इस पहल में अधिक अधिक से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण करने की अपील की है वहीं चंदन की इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में अब पर्यावरण के प्रति जागरूकता देखने को मिल रही है।

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