अब भावर में भी खिलेगा बुरांश का रंग, सीएम धामी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए की पहल।

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देहरादून। उत्तराखंड के राज्य वृक्ष बुरांश का अस्तित्व अब राज्य के भाबर व मैदानी इलाकों में लाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास परिसर में राजकीय वृक्ष बुरांश के पौधे का रोपण किया।
सामान्यतः बुरांश ऊंचाई वाले स्थानों पर पाया जाता है। पहली बार मुख्यमंत्री आवास परिसर में बुरांश के पौधे का रोपण किया गया है। राजकीय उद्यान सर्किट हाऊस में भी मुख्यमंत्री के निर्देशों पर बुरांश के पौध के रोपण किये गये हैं। इसके अलावा राजकीय उद्यान में बांज, देवदार, काफल, शहतूत, जामुन के पौधे भी लगाये जा रहे हैं।

मध्य हिमालय क्षेत्र में पाई जाती हैं 65 से अधिक प्रजातियां

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मध्य हिमालय क्षेत्र में 1500 मीटर से 3600 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाने वाले बुरांश की 65 से अधिक प्रजातियां मध्य हिमालय में बताई जाती हैं। रुद्रप्रयाग जिले में मद्महेश्वर, तुंगनाथ, चोपता, देवरियाताल, मोहनखाल, घिमतोली और जखोली में लाल, गुलाबी, सफेद, पीला और नीले रंग का बुरांश सबसे अधिक खिलता है। यह पुष्प सिर्फ बसंत के आगमन का ही नहीं, बल्कि प्रेम, उल्लास और यौवन का सूचक भी है। लोक गायकों, लेखकों और कवियों ने लोक गीतों, आलेखों और कविताओं में बुरांश की महिमा का बखान किया है।

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जंगलों के कटान से अस्तित्व पर खतरा
बुरांश या बुरुंश सुंदर फूलों वाला एक वृक्ष है। बुरांश का पेड़ उत्तराखंड का राज्य वृक्ष है तथा नेपाल में बुरांश के फूल को राष्ट्रीय फूल घोषित किया गया है। गर्मियों के दिनों में ऊंची पहाड़ियों पर खिलने वाले बुरांश के सूर्ख फूलों से पहाड़ियां भर जाती हैं। हिमाचल प्रदेश में भी यह पैदा होता है। लेकिन राज्य वृक्ष बुरांश के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। इसका कारण है, पहाड़ में जंगलों का अत्यधिक कटान। जंगलों के सीमित होने से बुरांश भी सिमटने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुरांश के बीजों को एकत्रित कर पौधों को नर्सरी में तैयार कर इसे संरक्षित किया जाना चाहिए।

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बुरांश के फायदे
लाल रंग वाले बुरांश के फूलों का औषधीय महत्व अधिक होता है। यह एंटी डायबिटिक, एंटीइंफ्लामेट्री और एंटी बैक्टिरियल गुणों से भरपूर होता है। इसके फूलों को बेहद स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। लोग इन्हें बवासीर, लीवर, किडनी रोग, खूनी दस्त, बुखार, रक्त की कमी को पूरा करने आदि के लिए औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं।

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