दुःखद :- उत्तराखंड सुर सम्राट हीरा सिंह राणा का निधन, गीतों के जरिए देवभूमि को दिलाई नई पहचान।।

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उत्तराखंड // देवभूमि के कोने कोने तक अपने सुरों के जरिए पहचान बनाने वाले उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोक गायक सुर सम्राट हीरा सिंह राणा का आज सुबह करीब 2:30 बजे दिल का दौरा पड़ने से हम सभी को अलविदा कह गए, अपनी सुरीली आवाज और सरल स्वभाव के चलते लोकगीतों की दुनिया में आवाज के जादूगर कहे जाने वाले हीरा सिंह राणा का जन्म 16 सितंबर 1942 को अल्मोड़ा जिले में हुआ था लोक कला और संस्कृति के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के चलते कई पुरस्कारों से सम्मानित सुर सम्राट ने अपने कई गीतों के जरिए लोगों के मन में अमिट छाप छोड़ी है

रंगीली बिंदी, घागर काई, धोती लाल किनर वाई, हाय हाय हाय रे मिजाता, हो हो होई रे मिजाता,जैसे सुप्रसिद्ध गीत के जरिए अपनी पहचान बनाने वाले सुर सम्राट हीरा सिंह राणा ने कुमाऊनी के कई एल्बम,‘आजकल है रे ज्वाना,’ ‘के भलो मान्यो छ हो,’ ‘आ लिली बाकरी लिली,’ ‘मेरी मानिला डानी रंगीली बिंदी, रंगदार मुखड़ी, सौमनो की चोरा, ढाई विसी बरस हाई कमाला, आहा रे ज़माना जबर्दस्त हिट रहे, उनके लोकगीत ‘रंगीली बिंदी घाघरी काई,’ ‘के संध्या झूली रे,’के जरिए सुर संगीत के ताने-बाने के जरिए विश्व भर में उत्तराखंड संस्कृति की पहचान बनाने का काम किया है और आज भी लोगों के दिलों में उनके गीत राज कर रहे हैं,

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