महानगरों की नौकरी छोड़कर गाँव में शुरू की पलायन रोकने की पहल, नयार वैली को मिले रोजगार के नए आयाम…

ख़बर शेयर कर सपोर्ट करें

उत्तराखंड के पहाड़ों में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है। राज्य बनने के 22 साल बाद भी आजतक यहां के युवा बेरोजगारी के दंश से खुद को नहीं बचा सके हैं। रोजगार की आस में घर से निकले लोगों ने गांव के गांव खाली कर दिए हैं। लेकिन इन सब के बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं जो महानगरों की सुविधाजनक ज़िंदगी छोड़कर गांवों में रोजगार के अवसर बनाकर ग्रामीणों के साथ जीवन बिता रहे हैं और गांव में स्टार्टअप शुरू करके लोगों को रोजगार दिला रहे हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही व्यक्तित्व के बारे में बताने जा रहे हैं। जिन्होंने महानगरों की सुविधाजनक ज़िंदगी को छोड़कर गांव की वादियों में स्वरोजगार शुरू करके यहां के लोगों को भी उससे जोड़ा है।

यह भी पढ़ें -   राज्य की रजत जयंती तक सर्वश्रेष्ठ राज्यों की सूची में शामिल होगा उत्तराखंड: सीएम धामी

” पलायन एक चिंतन ” नाम से स्वरोजगार शुरू करने वाले
पौड़ी जिले के मिरचौड़ा गांव के रहने वाले रतन सिंह असवाल आज यहां की नयार वैली के ग्रामीणों लिए एक खास उदाहरण बन हुए हैं। 2022 तक महानगरों में काम करने के बाद गांवों में रहकर स्टार्टअप करने वाले रतन सिंह का कहना है कि पलायन इस बेरोजगारी उत्तराखंड राज्य की सबसे बड़ी समस्या हैं।

दरअसल, रतन ने नयार वैली में अपने स्वरोजगार के जरिए पगांव के करीब 15 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से और कई लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिलाया है। रतन के इस स्टार्टटप में गांव के कई लोग जुड़ रहे हैं। पूरे राज्य से हर साल उनके पास हजारों की तादाद में लोग आते हैं और उनके काम की सराहना करते हैं।

यह भी पढ़ें -   वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पुण्यतिथि: पेशावर के इस महानायक को बीच सभा में गांधी जी ने टोका- यह गोरखा हैट पहने मुझे डराने के लिए कौन यहां बैठा है?

रतन नयार वैली में इन दिनों टूरिज्म, कुक्कुट पालन के जरिए लोगों को रोजगार दिला रहे हैं। रतन ने बताया कि उनकी ओर से बागवानी में भी काम किया जा रहा है जिसमे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को साथ लेकर उनकी ओर से गांवों को भी रोजगार दिलाया जा रहा है। पूर्व में उनकी पलायन एक चिंतन की टीम ने गढ़वाल में होने वाली ढांकर यात्रा को भी पहचान दिलाने के लिए रेस्ट हाऊस भी बनवाया, जहां यात्रियों के रहने की व्यवस्था की गई है। वहीं रतन ने बताया कि उनके फार्म के हैचरी चूज़े ले जा कर कई ग्रामीणों ने भी कुक्कुट पालन शुरू किया है। वहीं पलायन एक चिंतन की ओर से कई स्वरोजगार से जुड़े कोर्स कराए जा रहे हैं जिनमे मुख्य रूप से पैराग्लाइडिंग, कैच एंड थ्रो और एंगलिंग हैं।

यह भी पढ़ें -   वाह री नैनीताल पुलिस! अपराध नियंत्रण का दावा, पर फुटपाथियों तक का नहीं किया सत्यापन...

गांव में कई तरह से रोजगार के माध्यमों को विकसित करने की कोशिश में जुटे रतन ने सरकार से कौशल विकास के ट्रेनिग प्रोग्राम पूरे राज्य में चलाए जाने की अपील की है। उन्होंने राज्य में बढ़ रहे पलायन को लेकर कहा है कि राज्य में माइग्रेशन बहुत बड़ी समस्या है, इस पर सरकार को काम करना चाहिए।

Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments