नैनीताल: सरोवर नगरी में श्री नंदा देवी महोत्सव की भव्य तरीके से हुई शुरुआत, नंदा देवी मेले को ए श्रेणी में शामिल करने की उठी मांग

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नैनीताल। सरोवर नगरी का लोकप्रिय श्री नंदा देवी महोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को भव्य तरीके से हुआ। मां नंदा-सुनंदा का मेला इस बार पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। पिछले दो वर्षों में कोरोना के चलते मेले का आयोजन भव्य रूप से नहीं हो पाया था, हालांकि इस साल बिना किसी भी प्रतिबंध के मेले का आनंद लिया जा सकेगा।

गुरुवार को मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट, नैनीताल विधायक सरिता आर्या, हल्द्वानी विधायक सुमित हृदेश ने दीप प्रज्वलित कर श्री राम सेवक सभा परिसर में श्री नंदा देवी महोत्सव की शुरुआत की। इस मौके पर एकजुट होकर सभी ने नंदा देवी महोत्सव के दौरान लगने वाले मेले को ए श्रेणी में शामिल करने की केंद्र सरकार से मांग की।

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7 सितंबर तक इस महोत्सव का आयोजन होना है जिसके लिए पूरे नयना देवी मंदिर परिसर समेत पंत पार्क और मल्लीताल को सुंदर तरीके से सजाया गया है । साथ ही घरों में मां नयना देवी के झंडे लगाए गए हैं।


शुक्रवार को ज्योलीकोट के भल्यूटी गांव से केले के पेड़ लाए जाएंगे और मां नंदा और सुनंदा की मूर्ति का निर्माण होगा। 4 सितंबर यानि अष्टमी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में मूर्ति की स्थापना होगी। इस दौरान कई कार्यक्रम आयोजित होंगे और भक्त मां नंदा सुनंदा के दर्शन कर सकेंगे। नवमी के दिन भंडारे का आयोजन होगा। 7 सितंबर को पूरे नगर में डोला भ्रमण कराया जाएगा और ठंडी सड़क स्थित पाषाण देवी मंदिर के समीप डोले को विसर्जित किया जाएगा।

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नैनीताल में साल 1930 में पहली बार मनाया गया था नंदा देवी महोत्सव

राम सेवक सभा के वरिष्ठ कार्यकर्ता ललित तिवारी ने बताया कि उत्तराखंड की कुलदेवी और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के रूप में नंदा सुनंदा महोत्सव हर साल आयोजित किया जाता है। इस मेले में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं जिसमें उत्तराखंड की संस्कृति भी झलकती है। बताया कि वैसे तो नंदा सुनंदा मेले की शुरुआत अल्मोड़ा जिले से हुई थी। नैनीताल में साल 1903 में पहली बार यह महोत्सव मनाया गया था। साल 1918 में श्री राम सेवक सभा की स्थापना हुई थी। 1926 से नैनीताल राम सेवक सभा ने नंदा देवी महोत्सव का आयोजन शुरू किया जो वर्तमान तक हर साल मनाया जाता है

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