हल्द्वानी: नमामी जोशी, परंपरा को संजोते हुए कला के माध्यम से फैला रहीं सकारात्मक ऊर्जा

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हल्द्वानी के कठघरिया की रहने वाली नमामी जोशी, जो वर्तमान में भीमताल स्थित ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं, जिसने एक अनूठी पहल शुरू की है। उन्होंने उत्तराखंड की पुरानी परंपराओं को आधुनिकता के साथ जोड़कर गेहूं की सूखी तनों (पराल) से पेंटिंग्स बनाने की शुरुआत की है।

कभी पराल को सिर्फ पशुओं के चारे के रूप में देखा जाता था, लेकिन हमारे बुजुर्ग इसे वास्तुशास्त्र और सकारात्मक ऊर्जा से भी जोड़ते थे। घर की छत पर पराल लगाने से गर्मी कम होती थी और घर ठंडा रहता था। यही नहीं, घर के कोनों में पराल रखने को नकारात्मक ऊर्जा दूर करने का प्रतीक माना जाता था।

नमामी जोशी का कहना है कि आज भले ही आधुनिकता के दौर में लोग पराल को साधारण समझने लगे हों, लेकिन गेहूं की बालियों से बनी पेंटिंग्स आज भी घरों में शांति, समृद्धि और पॉज़िटिव वाइब्स लेकर आती हैं। उनका मानना है कि अगर इसे घर की उत्तर दिशा की दीवार पर लगाया जाए, तो यह वास्तु दोष को भी कम कर सकती है।

नमामी की कला में परंपरा की खुशबू और आधुनिकता का रंग एक साथ घुलता है। उनके द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स घर के वातावरण को न केवल सुंदर बनाती हैं, बल्कि उसमें एक सजीव और सुखद अहसास भी भर देती हैं।

नमामी जोशी कहती हैं, “यह सिर्फ पेंटिंग नहीं है, यह हमारी परंपरा, हमारी धरती की खुशबू और सकारात्मक ऊर्जा का संगम है। मैं चाहती हूं कि लोग इसे अपने घरों में लगाकर वही शांति और सुकून महसूस करें, जो हमारे बुजुर्ग महसूस किया करते थे।”

वही जो लोग इस अनोखी कला को अपने घर तक लाना चाहते हैं, वे उनसे 9927160344 पर संपर्क कर सकते हैं।

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