ज्‍योतिरादित्‍य पर बोले राहुल गांधी, सिंधिया ने विचारधारा को अपनी जेब में रखा और भाजपा में गए

Publish Date:Thu, 12 Mar 2020 05:43 PM (IST)

ज्‍योतिरादित्‍य पर बोले राहुल गांधी, सिंधिया ने विचारधारा को अपनी जेब में रखा और भाजपा में गए
ज्‍योरादित्‍य सिंधिया के बारे में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने कहा कि अपने राजनीतिक भविष्‍य को लेकर सिंधिया डरे हुए थे। यह विचारधारा की लड़ाई है।

नई दिल्‍ली, एएनआइ। कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए ज्‍योरादित्‍य सिंधिया के बारे में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने कहा कि अपने राजनीतिक भविष्‍य को लेकर सिंधिया डरे हुए थे। यह विचारधारा की लड़ाई है। सिंधिया की विचारधारा को मैं जानता हूं। सिंधिया के दिल में कुछ है और जबान पर कुछ। सिंधिया ने विचारधारा को अपनी जेब में रखा और भाजपा में गए। जल्‍द ही सिंधिया को अहसास होगा कि सिंधिया ने क्‍या किया। सिंधिया को भाजपा में न इज्‍जत मिलेगी और न संतुष्टि।  

ANI@ANI

#WATCH Rahul Gandhi, Congress: This is a fight of ideology, on one side is Congress & BJP-RSS on the other. I know Jyotiraditya Scindia’s ideology, he was with me in college, I know him well. He got worried about his political future, abandoned his ideology and went with RSS.6885:31 pm – 12 मार्च 2020Twitter Ads की जानकारी और गोपनीयता297 लोग इस बारे में बात कर रहे हैं

इससे पहले राहुल गांधी ने कहा था कि ज्योतिरादित्य ही एक ऐसे शख्स थे जिनके लिए उनके घर के दरवाजे हमेशा खुले रहते थे। कांग्रेस हाईकमान के करीबी सूत्रों ने तो यह भी कहा कि पारिवारिक निकटता के चलते ही सोनिया गांधी और राहुल गांधी को उम्मीद नहीं थी कि सियासी खींचतान के इस प्रकरण में सिंधिया पार्टी छोड़ने तक का बड़ा फैसला कर सकते हैं।

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सिंधिया को लंच पर लेकर गए थे राहुल

कांग्रेस के करीबी सूत्रों के अनुसार सिंधिया को हाईकमान से मुलाकात और संवाद का समय नहीं दिए जाने की बात गलत है। यह दावा भी सच्चाई से परे है कि एमपी कांग्रेस के अंदरूनी खींचतान का समाधान निकालने के लिए ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया को कोई विकल्प नहीं दिया गया। हकीकत यह है कि फरवरी के आखिरी हफ्ते में विदेश दौरे पर रवाना होने से पूर्व सीएम कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के साथ जारी तनातनी खत्म करने का फार्मूला निकालने के लिए राहुल गांधी ने सीधे ज्योतिरादित्य से बात की थी। राहुल गांधी इसके लिए सिंधिया को अपने साथ बाहर लंच पर लेकर गए थे, जहां दोनों की लंबी बातचीत हुई थी।

संतुष्ट नहीं थे सिंधिया

इसमें राहुल गांधी ने ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया को राज्यसभा उम्मीदवार बनाने का भरोसा दिया क्योंकि तब राज्यसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की गई थी। राहुल के इस आश्वासन के बाद भी सिंधिया संतुष्ट नहीं थे कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह मिलकर सूबे की सियासत में उनको किनारे लगाने का काम नहीं करेंगे। इसके बाद सोनिया गांधी ने भी सिंधिया को बुलाकर उन्हें एमपी कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया था। सिंधिया ने खुद इस पेशकश को लेकर रुचि नहीं दिखाई थी।

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इरादों को भांप नहीं पाया आलाकमान

कांग्रेस हाईकमान के करीबी सूत्र का कहना है कि सिंधिया के करीब एक साल से असंतुष्ट होने की बात से नेतृत्व वाकिफ था, इसीलिए उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार और प्रदेश अध्यक्ष बनने का विकल्प दिया गया। इस पर राजी नहीं होने का मतलब साफ है कि सिंधिया ने पार्टी छोड़ने का मन पहले ही बना लिया था। हालांकि हाईकमान से उनका संबंध इतना करीब का था कि सोनिया और राहुल दोनों अपनी पेशकश ठुकराए जाने के पीछे सिंधिया के इरादों को नहीं भांप पाए।

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